फिल्म “धुरेंद्र” एक ऐसे आम इंसान की कहानी है, जो हालात के हाथों मजबूर होकर असाधारण बन जाता है। सुरेन्द्र एक ईमानदार, मेहनती और सीधा-सादा युवक है, जो अपने गाँव में माता-पिता और छोटे भाई-बहन के साथ रहता है। उसका सपना है कि वह अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालकर एक इज़्ज़त भरी ज़िंदगी दे।Aartivlog
पिता की मौत के बाद धुरेन्द्र टूट जाता है, लेकिन माँ के शब्द उसे फिर खड़ा करते हैं —Aartvlog
“बेटा, अगर तू भी डर गया तो इस गाँव को कोई नहीं बचेगा।”
यहीं से धुरेन्द्र अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने का फैसला करता है। वह कानून और ताकत—दोनों का सही इस्तेमाल सीखता है। शहर जाकर वह अपने अंदर छिपी ताकत को पहचानता है और वापस गाँव लौटता है एक नए रूप में।Aartvlog
धुरेन्द्र रोज़ मेहनत-मज़दूरी करता है, लेकिन गाँव के दबंग और भ्रष्ट नेता उसकी ईमानदारी को उसकी कमजोरी समझते हैं। गाँव में ज़मींदार और माफिया का राज चलता है। गरीबों की ज़मीन छीनी जाती है, लड़कियों पर ज़ुल्म होता है और पुलिस पैसे के आगे बिक चुकी होती है। Aartivlog77
धुरेन्द्र इन सब के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, लेकिन हर बार उसे दबा दिया जाता है। एक दिन दबंगों की साज़िश में उसके पिता को झूठे केस में फँसा दिया जाता है और जेल में उनकी मौत हो जाती है। यही घटना सुरेन्द्र की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देती है।




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